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CICADA 3301: इंटरनेट का अनसुलझा रहस्य

CICADA 3301 यानी सिकाडा दिखने में ये एक कोड की तरह लगे पर ये नाम सबसे रहस्यमयी पहेली का है। ये इंटरनेट की दुनिया का ऐसा रहस्य रहा है जिसे सुलझाते ही लोगों की नौकरी लग जाती थी। माना जाता है कि ये दुनिया की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसी का बुद्धिमान लोगों को खोजने का तरीका रहा है। 2012 में आई थी पहली पहेली…

 

 

– इसकी शुरुआत तब से मानी जाती है जब 4CHAN नाम की एक वेबसाइट से एक मैसेज वायरल हुआ था। इसमें लिखा गया था कि एक एजेंसी ऐसे बुद्धिमान लोगों को खोज रही है जो कि इस ‘खास पहेली’ को सुलझा दे। 2012 में पहली पहेली सामने आई, जिसमें कुछ कोड थे। ये हर किसी की समझ से परे था। पर समझने वाले समझ चुके थे।

फिर शुरू हुआ सिलसिला
– 2012 में कुछ लोगों ने दावा किया कि उन्होंने पहेली को सुलझा लिया है। कुछ समय बाद इन लोगों के अचानक कहीं चले जाने की बातें भी सामने आने लगीं। इसके बाद हर साल सिकाडा 3301 नाम से पहेलियां सामने आने लगीं। सॉफ्टवेयर इंजीनियर से लेकर कई एक्सपर्ट इन पहेलियों को सुलझाकर खुद को आजमाते रहे।
– इसके बाद 2013 और 2014 में भी ये पहेलिया इंटरनेट पर सामने आईं। कुछ लोगों का मानना है कि यह काम CIA का है जो कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ हैकरों को इकठ्ठा करना चाहती है |

2015 में नहीं आया पजल
– ये माना जाने लगा कि ये दुनियाभर के सबसे बेहतरीन कोड ब्रेकर और हैकरों को खोजने की तरकीब थी। इसी बीच 2015 में ये पजल लोगों के सामने नहीं आई। अचानक 2016 ट्विटर पर एक मैसेज फ्लैश हुआ, Beware false paths. Always verify PGP signature from 7A35090F जिसका अर्थ था कि नकली पजल से बचें। सिग्नेचर की जांच के बाद ही आगे बढ़ें। इसका मतलब ये था कि कुछ दूसरे हैकर और एजेंसी भी ऐसा ही मैसेज चला रही थीं।

क्या होता था इन पजल में?
– ये पजल और पहेलियां पूरी तरह से डाटा सिक्युरिटी, क्रिप्टोग्राफी और स्टेनोग्राफी से संबंधित थीं। इन्हें इंटरनेट इतिहास की सबसे जटिल पहेली बताया जाता था।

तो कौन कर रहा था ये सब?
– इंटरनेट की दुनिया में यूं तो कई चीजें चलती रहती हैं, जिसके बारे में हम नहीं जानते। पर ये एक ऐसी पहेली थी जो सुलझने के बाद भी अनसुलझी है। माना जाता है कि इसमें सीआईए, एनएसए और एमआई सिक्स जैसे एजेंसियों का हाथ हो सकता है, जो कई देशों में सीक्रेट मिशन चलाती हैं।

सालों से जारी है डिबेट

– यूं तो माना जाता है कि ये दुनियाभर की खुफिया एजेंसियों का सबसे बुद्धिमान लोगों को चुनने का तरीका हो पर सोशल मीडिया पर इसे कई तरह से देखा जाता है। लोग मानते हैं कि सरकारें पर्दे के पीछे ऐसी चीजों भी चलाती है, जिसे वो आम जनता को नहीं बताना चाहती और एेसी पहेली सिर्फ चुनिंदा लोग ही समझ पाते हैं।

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